Sunday, March 22, 2026

ज्ञान -15

 ज्ञान -15

       ज्ञान कभी बन्धन नहीं हो सकता, वह तो सदैव मुक्त करने वाला है । हम ज्ञान का किस प्रकार उपयोग करते हैं, यह महत्वपूर्ण है । एक दृष्टांत के माध्यम से अपनी बात स्पष्ट करता हूँ । एक ब्राह्मण था । वह अपने जीवनयापन के लिए भागवत-कथा किया करता था । ब्राह्मण की दयनीय अवस्था देखकर धनाढ्य लोग अपने घर पर उनसे भागवत-कथा करवाया करते थे । एक बार उस नगर के राजा ने भी ब्राह्मण को कथा के लिए बुलवा लिया । 

         भागवत-कथा सात दिन के लिए होती है । प्रतिदिन कथा समाप्त करने के पश्चात् ब्राह्मण राजा से पूछता - ‘महाराज ! कथा समझ में आई ?, राजा प्रत्युत्तर में कहता - ‘ब्राह्मण देवता, पहले आप ही समझ लें ।’ प्रतिदिन ऐसा ही होता रहा, ब्राह्मण का एक ही प्रश्न और राजा का भी वही उत्तर । ऐसा होते-होते छठा दिन भी बीत गया । रात्रि को ब्राह्मण ने राजा द्वारा कहे जा रहे शब्दों पर गंभीरता से विचार किया । भीतर एक बिजली सी कौंधी और तत्क्षण ही ब्राह्मण को कथा पूर्ण रूप से समझ में आ गई ।

         प्रातःकाल होते ही ब्राह्मण ने ब्राह्मणी को कुछ समझाया और राजा के यहाँ जाने के स्थान पर वन की और प्रस्थान कर गए । राजा ने ब्राह्मण का कुछ समय तक तो इंतज़ार किया फिर और अधिक देरी होती हुई देखकर अपने अधीनस्थों को ब्राह्मण को लिवा लाने के लिए भेजा ।

क्रमशः

प्रस्तुति - डॉ. प्रकाश काछवाल

।। हरिः शरणम् ।।

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