ज्ञान उदय जब होत है …..9
हाँ, तो बात चल रही थी कि गुरु तो चले गए और उनके शिष्य ही नए गुरु के रूप में अपने शिष्य को ज्ञान देने लगे । एक रात को नए सन्त ने स्वप्न में अपने गुरु को देखा । गुरु ने कहा कि बेटे, मैं तुम्हें एक महत्वपूर्ण बात बता रहा हूँ, ध्यान से सुनना । तालाब में मछली का शिकार करने आए बगुले को कभी भी मत उड़ाना । मैंने एक दिन मछली का शिकार करने आए बगुले को उड़ा दिया था, जिससे वह बगुला उस दिन भूखा ही रह गया । मैंने सोचा था कि मछली के प्राण बचाने के लिए किए गए कर्म से मुझे पुण्य प्राप्त होगा परंतु भूखे बगुले को उड़ा देने के कारण वह मेरे लिये पाप कर्म बन गया ।
दिवंगत सन्त अपने शिष्य को स्वप्न में आगे कह रहे हैं कि बगुले के भूखे रह जाने से बने पाप कर्म के कारण मुझे कुछ दिनों के लिए नरक में जाना पड़ा । वहाँ मैं कई दिनों तक भूखा बैठा रहा । अपना पाप कर्म भुगतने के बाद आज ही मैं वहाँ से मुक्त हुआ हूँ । इसलिए तू मेरी इस बात की गाँठ बाँध ले कि तालाब में आए बगुले को भूलकर भी मत उड़ाना । इतना सुनते ही नए गुरु का स्वप्न टूट गया । उन्होंने मन में यह बात दृढ़ता से बिठा ली कि तालाब में आए बगुले को किसी भी हाल में उड़ाना नहीं है ।
क्रमशः
प्रस्तुति - डॉ. प्रकाश काछवाल
।। हरिः शरणम् ।।