Monday, March 16, 2026

ज्ञान -9

 ज्ञान -9

          प्रस्तुत है गार्गी और याज्ञवल्क्य के मध्य हुए कुछ अन्य प्रश्न और उत्तर, संवाद रूप में, जिनका वर्णन बृहदारण्यक उपनिषद् में विस्तार से किया गया है । ये प्रश्न आत्म-बोध की यात्रा में एक गृहस्थ का मार्गदर्शन करते हैं । गार्गी पूछ रही है कि महात्मन् ! ऐसा माना जाता है, स्वयं को जानने के लिए, आत्म-बोध के लिए ब्रह्मचर्य अनिवार्य है परन्तु आप तो ब्रह्मचारी नहीं हैं । आप स्वयं के दो दो पत्नियां हैं । क्या ऐसा नहीं लगता कि आप एक अनुचित उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं ?

           प्रश्न का उत्तर देने के स्थान पर याज्ञवल्क्य जी गार्गी से ही प्रतिप्रश्न करते हैं, ‘गार्गी ! ब्रह्मचारी कौन होता है ?’ गार्गी कहती है कि ब्रह्मचारी वह है, जो परम सत्य की खोज में लगा है । ‘फिर तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि एक गृहस्थ परम सत्य तक नहीं पहुँच सकता ।’ याज्ञवल्क्य ने पूछा । गार्गी कहती है कि ब्रह्मचारी स्वतंत्र होता है और गृहस्थ बंधन में । केवल स्वतन्त्र ही परमसत्य की खोज कर सकता है । विवाह को तो बन्धन कहा जाता है । याज्ञवल्क्य फिर प्रश्न करते हैं, ‘ क्या विवाह बन्धन है ?’ गार्गी ने कहा -‘निःसंदेह’ क्योंकि वैवाहिक जीवन में व्यक्ति को औरों का भी ध्यान रखना पड़ता है । पहले पत्नी की चिंता, फिर संतान की चिंता । इस प्रकार सांसारिक चिंताओं से घिरे व्यक्ति को आत्म-चिंतन के लिए समय ही कहाँ मिल पाता है ऐसे में वह मुक्त कैसे हो पाएगा ?’ 

क्रमशः

प्रस्तुति - डॉ. प्रकाश काछवाल

।। हरिः शरणम् ।।

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