Thursday, February 12, 2026

नाभावो विद्यते सत: -11

 नाभावो विद्यते सतः -11

        अभाव असत् में ही क्यों होता है ? कारण है - जीवन में संतुष्टि का न होना । मान लीजिए — आपके पास 10 हैं । अब आपको 20 चाहिए । 20 मिल गए तो अब आपको 50 चाहिए । क्यों ? क्योंकि जो चीज़ स्थिर नहीं, वह कभी संतोष नहीं दे सकती । इसलिए असत् जितना मिलेगा, उतना ही और नया अभाव पैदा करेगा । एक बहुत साधारण सा उदाहरण देता हूँ - नींद में किसी प्रकार के अभाव का अनुभव नहीं होता है । जब आप गहरी नींद में होते हैं, तब न तो भूख होती है, न डर, न चाह । क्यों ? क्योंकि उस समय आप अपने “सत्” के सबसे क़रीब होते हैं। नीन्द में कोई अभाव नहीं होता, क्योंकि उस समय मन नहीं होता । नींद में मन अविद्या में लीन हो जाता है ।

     मूल बात यह है कि अभाव वस्तु में नहीं है । अभाव तो मन की कल्पना मात्र है । जब मन असत् की ओर भागता है तब अभाव पैदा होता है । जब मन सत् में ठहरता है तब पूर्णता का अनुभव होता है । इस एक पंक्ति में ही पूरा अर्थ स्पष्ट हो जाता है कि जो बदलता है, उसी में सदैव कमी दिखती है और जो स्थिर है, उसमें कमी की संभावना ही नहीं है ।

क्रमशः 

प्रस्तुति - डॉ. प्रकाश काछवाल

।। हरिः शरणम् ।।

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