मौन -10
शरीर और इंद्रियों पर जब पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो जाता है तब मन को शान्त और निर्मल करने की ओर आगे बढ़ना चाहिए । काष्ठ मौन की अवस्था तक पहुंच जाने के बाद भी अभी तक मौन की पूर्णता तक नहीं पहुंचा गया है । उससे भी आगे मन को शान्त करते हुए उसे अमन बनाना है, तभी वास्तविक मौन घटित होगा ।
वाक्, इंद्रिय और काष्ठ, तीनों ही काष्ठ मौन हैं क्योंकि अभी तक मन की उठापटक नहीं मिट सकी है । बाह्य रूप से संयमित जीवन प्रतीत तो अवश्य होता है परंतु भीतर ही भीतर कुछ खटक रहा होता है । वाक् मौन में स्वर-यन्त्र काष्ठ हो जाता है और इंद्रिय मौन में इंद्रियाँ । जब सम्पूर्ण स्थूल शरीर ही मौन अवस्था को प्राप्त हो जाता है, तब यह पूर्ण काष्ठ मौन है । परन्तु अभी भी सूक्ष्म शरीर कमोबेश सक्रिय बना हुआ है । इस सक्रिय सूक्ष्म शरीर को भी शान्त करके सुषुप्ति अवस्था में ले जाना है । जब सूक्ष्म शरीर भी सो जाता है, तब इस अवस्था को सुषुप्ति मौन कहा जाता है ।
सुषुप्ति मौन से तात्पर्य है, गहरी निद्रावस्था जैसी शान्ति, लेकिन पूर्ण जागरूकता के साथ । यह जाग्रत सुषुप्ति अवस्था है । सुषुप्ति मौन में मन, बुद्धि और अहंकार शान्त हो जाते हैं । फिर इस अवस्था में न तो विषयों की ओर दृष्टि जाती है और न ही उनका अनुभव होता है ।
क्रमशः
प्रस्तुति - डॉ. प्रकाश काछवाल
।। हरिः शरणम् ।।
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