Friday, June 26, 2026

आसक्ति से अनुरक्ति की ओर -33

 आसक्ति से अनुरक्ति की ओर -33 

                       आरिफ सुभानी से प्रभावित होकर एक दिन एक व्यक्ति उनके पास आया । उसने कहा कि ‘मैं आपसे से प्रभावित होकर आया हूँ और आपके साथ रहकर अल्लाह की बंदगी करना चाहता हूँ ।’ सुभानी ने पूछा-“क्या ऐसा करने के लिए तुम्हें मेरे अतिरिक्त अन्य कोई नहीं मिला ?” उसने उत्तर दिया-‘नहीं, वैसे तो अल्लाह की बंदगी करने वाले बहुत से हैं परन्तु मैं आपके व्यवहार से प्रभावित होकर आपके पास वह सब कुछ सीखने आया हूँ, जो किसी अन्य के पास नहीं है । मैं आपके पास रहकर बहुत कुछ सीखना चाहता हूँ ।’ दरवेश स्वयं में मस्त था, उसे किसी अन्य की उपस्थिति बहुत खलती थी । इसलिए उन्होंने स्पष्टतः आगन्तुक अपने पास रखने से मना कर दिया ।

                वह व्यक्ति उनके सामने गिडगिडाते हुए कहने लगा कि ‘जब आप ही मुझे अपने पास नहीं रख रहे हैं तो आप ही बताइए मैं क्या करूँ, आप में जो कुछ है, उसे पाने के लिए किसके पास और कहाँ जाऊं ? मैं कैसे अपने आपको आपकी तरह का इंसान बना सकता हूँ ?’ सुभानी ने कहा कि ‘तुम जिस धर्म को मानते हो, उसके अतिरिक्त किसी अन्य धर्म को मानने वाले के पास चले जाओ । तुम इस्लाम में विश्वास करते हो तो किसी एक ईसाई धर्म में विश्वास करने वाले के पास चले जाओ । उसके पास बैठो, उसकी सब कुछ सुनो परन्तु ध्यान रखना, प्रत्युतर में उसे भला-बुरा कुछ भी नहीं कहना है ।’

क्रमशः

प्रस्तुति - डॉ. प्रकाश काछवाल

।। हरिः शरणम् ।।

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