सम्भवामि युगे युगे - 23
हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप सतयुग में असुर थे, अब त्रेता में वे ब्राह्मण वर्ण में पैदा होंगे । अवश्य ही उन्होंने अपने आसुरी जीवन में ऐसे कर्म किए हैं, जो उनको ब्राह्मण शरीर तक ले जा रहे हैं । ब्राह्मण वर्ण में पैदा होकर भी रावण-कुम्भकरण में आसुरी सम्पदा की प्रबलता रहेगी क्योंकि उन पर सनकादिक ऋषियों का श्राप प्रभावी रहेगा । प्रश्न उठता है कि सतयुग से त्रेता तक की अवधि में उनकी जीवात्मा कहां रही ?
जैसा कि लेख के प्रारम्भ में ही मैंने स्पष्ट कर दिया है कि सब कुछ माया के खेल हैं । प्रकृति में परमात्मा द्वारा डाले गए विधान के अनुसार जीव अपने कर्मों के अनुसार ऊंची-नीची योनियों में जन्म लेकर भटकता रहता है । पुनः मानव देह मिलने से पूर्व भी वह कई जीव जैसे पशु, पक्षी यहाँ तक कि मनुष्य के रूप में भी कई शरीर भोग चुका होता है । हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप ने भी ऐसे ही कई शरीरों से चौरासी की यात्रा तय की होगी । मानस में गोस्वामीजी ने प्रतापभानु की कथा के माध्यम से इस ओर संकेत भी किया है ।
एक देश- कैकय, वहाँ के राजा हैं, सत्यकेतु । इनके दो पुत्र - प्रतापभानु और अरिमर्दन । राज्य का उत्तराधिकारी बना, प्रतापभानु । प्रतापभानु राजा के सचिव थे, धरमरुचि । प्रतापभानु के राज्य में प्रजा बड़ी सुखी थी । सचिव धरमरुचि राजा के हितकारी और धार्मिक प्रवृति के थे । प्रतापभानु उनकी सलाह लेकर राज्य का संचालन करते थे । बस, एक जगह प्रतापभानु से चूक हो गई, वे अपने सचिव की सलाह न ले सके । जब संग अच्छा होता है तो शान्ति बनी रहती है, भीतर भी और बाहर भी । जहां कुसंग हुआ कि सब मटियामेट । एक चूक ने ही प्रतापभानु के साथ-साथ अरिमर्दन और धरमरुचि के भी प्राण ले लिए । इस चूक के साथ ही विधि ने तीनों को असुर योनि में डाल दिया । प्रतापभानु - रावण, अरिमर्दन-कुम्भकरण और धरमरुचि-विभीषण । चलिए ! पूरे वृतान्त पर दृष्टि डाल लेते हैं ।
राजा प्रतापभानु ने इस पृथ्वी पर एकछत्र राज किया था । चाहे संसार के सभी भोग-पदार्थ मिल जाए परन्तु व्यक्ति सन्तुष्ट नहीं हो सकता । प्रथम तो जो मिला है वह उसे सदैव अपर्याप्त लगता है और यदि सबकुछ मिल भी जाता है तो सदैव उसे खोने का भय सताता रहता है । प्रतापभानु दूसरी श्रेणी के राजा है । पूरी पृथ्वी को जीत लिया, अब अपना राज्य पूर्ण रुप से सुरक्षित रहे, केवल यही चिन्ता है ।
क्रमशः
प्रस्तुति - डॉ. प्रकाश काछवाल
।। हरिः शरणम् ।।
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