Monday, April 20, 2026

ज्ञान उदय जब होत है.....1

 ज्ञान उदय जब होत है …..1

         गीता हमारा मुख्य प्रासादिक ग्रन्थ है । जीवन की प्रत्येक समस्या का समाधान इसमें मिल जाता है । मनुष्य के जीवन में तो अनन्त समस्याएं हैं, एक का निवारण नहीं होता कि तब तक दूसरी समस्या सामने आ खड़ी होती है । ऐसे में क्या यह सम्भव है कि जीवन की प्रत्येक समस्या का समाधान गीता से हो सकता है ? मनुष्य की प्रत्येक समस्या कर्म आधारित होती है और उसका समाधान कर्म के माध्यम से ही हो सकता है । गीता को मुख्य रूप से कर्मयोग का ग्रन्थ कहा जाता है । इसमें कर्मों से समस्या कैसे पैदा होती है और उस समस्या का कर्म करते हुए कैसे निवारण किया जा सकता है, विस्तार से वर्णन किया गया है ।

         प्रश्न उठता है कि जब समस्त समस्याओं के मूल में कर्म ही है तो फिर क्यों न कर्म करने से पीछे ही हट जाएं ? कहना बड़ा आसान है पर वास्तविकता है कि कर्म करने से दूर हुआ नहीं जा सकता । भगवान कहते हैं - 

 न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् ।

 कार्यते ह्यवश: कर्म सर्व: प्रकृतिजैर्गुणै ।। गीता - 3/5।।

अर्थात् कोई भी मनुष्य किसी भी अवस्था में क्षणमात्र भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता, क्योंकि प्रकृति के परवश हुए सब प्राणियों से प्रकृतिजन्य गुण कर्म करवा लेते हैं ।

क्रमशः 

प्रस्तुति - डॉ. प्रकाश काछवाल

।। हरिःशरणम् ।।

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