Tuesday, March 31, 2026

ज्ञान - मुक्ति का मार्ग

 ज्ञान - मुक्ति का मार्ग 

          ‘ज्ञान - बंधन या मुक्ति’ लेख से स्पष्ट हो जाता है कि यदि ज्ञान का सदुपयोग किया जाए तो वह मुक्ति के द्वार खोल देता है । ज्ञान वह साधन है जो साधक को साध्य का अनुभव करा सकता है । मनुष्य की सबसे बड़ी विडम्बना है कि वह ज्ञान का सदुपयोग नहीं कर पा रहा है । प्रत्येक मनुष्य में ज्ञान जन्मजात होता है , बस वह केवल अज्ञान के नीचे दबा पड़ा रहता है । जिस प्रकार प्रत्येक पत्थर में मूर्ति छिपी रहती है और अवांछित पत्थर को हटा दिया जाये तो मूर्ति प्रकट हो जाती है वैसे ही अज्ञान से मुक्त होते ही ज्ञान प्रकाशित होने लगता है । 

        अज्ञान के हटते ही भीतर ज्ञान का उदय हो जाता है । यह अज्ञान कैसे हटाया जा सकता है ? ज्ञान जाग्रत हो जाने से साधक जीवन्मुक्त हो जाता है ? क्या साधक के लिए केवल मुक्ति ही पर्याप्त है अथवा फिर भी कोई कमी शेष रह जाती है ? आइए! ऐसे ही ज्ञान से सम्बन्धित कुछ प्रश्नों के उत्तर जानते हुए भक्ति तक पहुंचने का प्रयास करते हैं । 

       ज्ञान से भक्ति अथवा भक्ति से ज्ञान, दोनों कथन ही सही हैं । यह हमारे स्वभाव (प्रकृति) पर निर्भर करता है कि हम किस मार्ग के योग्य हैं । ज्ञान मुक्ति का दाता है जबकि भक्ति प्रेम की । मुक्ति शान्ति प्रदान कर सकती है परन्तु संतुष्टि तो प्रेम से ही मिलती है । हम इस लेख ‘मुक्ति अथवा भक्ति’ के माध्यम से यह जानने का प्रयास करेंगे कि ज्ञान और भक्ति, दोनों ही हमारे जीवन में कैसे उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं ? 

।। हरिः शरणम् ।।

प्रस्तुति - डॉ. प्रकाश काछवाल

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