आसक्ति से अनुरक्ति की ओर -9
मेरे एक मित्र है, बड़े ही सरल ह्रदय व्यक्ति है । जब से मैं उनके संपर्क में आया हूँ तब से उन्हें तम्बाकू का विभिन्न रूपों में सेवन करते हुए देख रहा हूँ, कम से कम 45-50 वर्ष तो हो ही गए होंगे । मेरे आग्रह पर उन्होंने तम्बाकू का सेवन करना कोई 20 बार छोड़ दिया है परन्तु प्रत्येक बार कुछ समय बाद पुनः उसका सेवन प्रारम्भ कर देते हैं । वास्तव में देखा जाये तो उन्होंने कभी तम्बाकू के सेवन को मन से त्यागा भी नहीं था । 20 बार वे तम्बाकू की आसक्ति त्यागकर उससे विरक्त होने का प्रयास तो किया परन्तु यह उनकी तम्बाकू से पूर्ण विरक्ति नहीं थी बल्कि उससे विरक्त होने का नाटक भर था । अगर वास्तव में वे विरक्त हुए होते तो पुनः तम्बाकू का सेवन करना प्रारम्भ ही नहीं करते ।
यह तो एक प्रकार का दोलन करना था आसक्ति और विरक्ति के मध्य । वास्तव में तो उनकी तम्बाकू के प्रति आसक्ति कभी विरक्ति में परिवर्तित हुई ही नहीं थी । आज भी वे मुझसे छिपकर तम्बाकू का सेवन करते हैं और स्वीकार भी करते हैं कि जब 20 बार के प्रयास से भी आदत नहीं छूटी तो अब छूट भी नहीं सकती । अब उन्होंने तम्बाकू को छोड़ने का संकल्प करना भी छोड़ दिया है ।
क्रमशः
प्रस्तुति - डॉ. प्रकाश काछवाल
।। हरिः शरणम् ।।
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